SC/ ST. ACT. UGC. ACT.की आड़ में मोदी जी और मोहन भागवत जी लिख रहे है भाजपा केअंत की कहानी

याद करो तुम वो दिन जो लौट के कभी न आये

 

मैं तो समस्त भारत वासी से ये विनम्र आग्रह करना चाहता हु की याद कीजिये २०१४| वो लच्छेदार भारत के भविष्य को नई दुनिया दिखानेवाला शूरमा आज सबो को क्यों चुभने लगा , आज बीजेपी के संस्थापक जो भी होंगे जहा भी होंगे उनकी आत्मा तड़प रही होगी क्युकी धीरे धीरे जो दृश्य सामने आ रहे विचलित करने वाले हैं , आज 6 अप्रैल भाजपा का स्थापना दिवस है और 2001 के बाद से ऐसा पहली बार हो रहा है कि इसका कोई उत्साह नहीं है और मन गहरे समुद्र की तरह शांत और अविचल है और सबकुछ ऐसे देख रहा हूँ जैसे कोई उत्सव चल रहा हो और मन बीतरागी हो और उसे कोई फर्क न पड़े कि क्या हो रहा है| पता है ऐसा हमलोग क्यों अनुभव कर रहे है क्युकी ये दिन धीरे धीरे लगभग बीजेपी के चाहनेवालो के दिलो में खास जगह बना लिया था |

बस एक लक्ष्य देश से कांग्रेस को मिटाना

 

6 अप्रैल  1980 का ये दिन एक नए जिद के शुरुआत का दिन था जो देश से कांग्रेस के कुशासन को खत्म करने और राम राज्य की स्थापना  के लिए आडवाणी जी अटलजी के मन में वर्षों से थी | मानो इन्होने उसे मूर्त रूप दिया कि चलो जो भी होगा हम अकेले करेंगे | अब हम किसी जनता पार्टी के हाथों में नहीं खेलेंगे और राष्ट्र सेवा में जो आहुति लगेगी वो देंगे| इतने मजबूत इरादे और इससे भी कही ज़्यादा दृढ़संकल्प था एक भारत श्रेष्ठ भारत का विश्व गुरु बनकर दुनिया को नया आयाम देने का और विश्व के लिए नई सांस्कृतिक ईमारत खड़ी करने का और आहुति रंग भी लाई और 1984 में भले 2 सीट आयीं पर उसके बाद  आडवाणी जी ,अटल जी  सहित बीजेपी पूरी पार्टी ने कभी भी  पीछे मुड़कर नहीं देखा 1989 में अपने दम पे  85 सीट आयीं तो एक सुसभ्य राजीनीतिक आहट पुरे देश ने सुनी | सन 1991 में बीजेपी  120 सीट जीत कर मजबूती का एहसास कराया | सन  1996 में  161 सीट लेकर सरकार में दावेदारी पेश कर दी | अटल जी प्रधानमंत्री बने और यकीन मानिए हम जैसे छोटे आयु के किशोरों के लिए हमारे अटल जी को शपथ लेते देखने का दृश्य 16 मई 1996 का मानो वो  दिन आज भी जेहन को  रोमांचित कर जाता है |

अडवाणी अटल युग की शुरुआत

 

दूसरी बार आदरणीय आडवाणी अटल जी के नेतृत्व में  1998  के चुनाव में  182 सीट जीती और अटलजी फिर देश के प्रधानमंत्री बने| जल्द ही सरकार गिरी लेकिन कारगिल युद्ध की उपलब्धि से तुरंत ही  सन 1999 के चुनाव में  182 सीट के साथ सरकार की वापसी हुईं |  पर अचानक शाइनिंग इंडिया के बाद 2004 में 138 सीट को देख हम अवाक थे कि सर्वकलिक सर्वोत्तम सरकार देने के बाद भी ये हार कैसे हुईं….?
वजह था ओवर कॉन्फिडेंस और पार्टी का अपने मूल मुद्दे से भटक जाना और कई मुद्दों पर समझौते कर लेना थोड़ा कड़ुवा जरूर है पर आज मोदी सरकार पूर्णरूपेण ओवरकॉन्फिडन्स में उससे भी भयानक गलती करे जा रही |

खैर काफी संघर्षों के बाद 2014 में 16 मई को असंख्य कार्यकर्ताओं के नेत्र आनंद अश्रुओं से भीगे हुए थे और पूरा भारत भगवामय था | और उसका आनंद अनिर्वचनीय था…
पर हम मूर्खों को कहां पता था कि 16 मई हमारे खुशी का आखिरी दिन है और अगले दिन हिंदुत्व के आड़ में हिंदुओं को बांटा जाएगा और एक एक करके सब बटेंगे और कटेंगे बस बटने और कटने का अंदाज अलग अलग होगा |अब भाजपा अटल आडवाणी जी  की भाजपा नहीं बल्कि मोदी की भाजपा बन चुकी है या फिर इसे ईस्ट इंडिया कम्पनी का राष्ट्रवादी वर्जन कहें तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा |

खैर सभी भाजपा कार्यकर्त्ता  अवैतनिक और वैतनिक “कर्मचारियों” को भाजपा की स्थापना दिवस की बधाइयां और हम जैसे पूर्व कार्यकर्ताओं के लिए न तो दुख है न विषाद है न लगाव है न रोमांच है न उत्साह है और न रंज… हम बस जड़वत हैं और जड़वत होकर भाजपा के पतन का अवनयन कोण देख रहे हैं|

डायन भी अपने घर को बकश देती है 

 

क्युकी डायन भी अपने घर नहीं खाती, वो भी  अपने घर को बकश देती लेकिन मोदी और संघ के संयुक्त डायनी अंदाज ने देश के              सामाजिक सौहार्द को पूरी तरह से चौपट करने का  ठेका ही ले लिया | मैं संछिप्त रूप से समझने का प्रयास करता हु | अटल जी अडवाणी जी मुरली मनोहर जोशी जैसे लाखो सवर्णो ने  धन दौलत  समय बचपन जवानी या यु कहे तो अपने खून पसीने से इस पार्टी को सींचा, लेकिन इनके कुकर्मो और गलत मानसिकता के कारण आज सवर्ण समाज  राजनीतिक ‘शून्य’ की ओर बड़ी तेजी से  बढ़ते जा रही |
आँकड़े झूठ नहीं बोलते! आज सवर्ण समाज (क्षत्रिय, ब्राह्मण,कायस्थ,सिख,जैन और वैश्य) जिस राजनीतिक उपेक्षा का शिकार हो रहा है, उसे इन तथ्यों के जरिए समझिए:

📊 राज्यसभा में क्षत्रिय समाज का सूपड़ा साफ (अमित शाह-मोदी की स्क्रिप्ट):

An activist is protesting and burning an effigy and tires as they block a road during a protest against a recent scam in the NEET and UGC-NET exams in Kolkata, India, on June 25, 2024. (Photo by Debajyoti Chakraborty/NurPhoto via Getty Images)

 

देश के प्रमुख राज्यों में राज्यसभा की सीटों पर क्षत्रिय समाज का प्रतिनिधित्व ‘शून्य’ तक पहुँच चुका है:
बिहार: 16 में से 0
राजस्थान: 10 में से 0
झारखण्ड: 6 में से 0
छत्तीसगढ़: 5 में से 0
मध्य प्रदेश: 11 में से 0 (दिग्विजय सिंह का कार्यकाल समाप्त)
महाराष्ट्र: 19 में से 0
हरियाणा: 5 में से 0
हिमाचल: 3 में से 0
उत्तराखंड: 3 में से 0
दिल्ली: 3 में से मात्र 1
गुजरात: 11 में से मात्र 1
उत्तर प्रदेश: 31 में से मात्र 3
कुल स्थिति: वर्तमान में 245 राज्यसभा सांसदों में मात्र 5 क्षत्रिय बचे हैं (4 BJP, 1 AAP)। यह 1% की कमी भी अगली बार पूरी हो जाएगी।

📉 तमिलनाडु: ब्राह्मणों को ‘राजनैतिक अछूत’ बनाने की  शुरुआत

 

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मुख्य दलों ने एक भी टिकट ब्राह्मण को नहीं दिया। यह प्रयोग अब उत्तर प्रदेश में भी शुरू हो चुका है—रामपुर से सहारनपुर तक भाजपा में एमपी-एमएलए तो छोड़िए, ब्लॉक प्रमुख तक ब्राह्मण नहीं बनाए जा रहे।

🧐 कड़वा सच: दरी आपकी, मलाई उनकी!

जमीनी हकीकत: भाजपा के 90% बूथ अध्यक्ष और जमीनी कार्यकर्ता ब्राह्मण, ठाकुर और बनिया हैं।
सत्ता का चेहरा: अर्जुन मेघवाल  सुप्रिया पटेल, साक्षी महाराज लोधी, एसपी सिंग बघेल,और धर्मेंद्र प्रधान, रामदास अठावले जैसे सैकड़ों नेता आपके वोटों की सीढ़ी चढ़कर ऊपर पहुँचते हैं और फिर आप ही के खिलाफ कानून और आरक्षण का जाल बुनते हैं।
न्याय का दोहरा मापदंड: आज न्याय चरित्र देखकर नहीं, जाति देखकर होता है। सवर्णों को अपराधी घोषित करने के लिए यूजीसी जैसे नियम लाए जा रहे हैं।
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा सवर्ण हूँ मेरा, रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा”

⚠️ भविष्य की भयावह तस्वीर

मुसलमानों को योजनाओं से मजबूत किया जा रहा है, जबकि सनातनी स्तंभों (ब्राह्मण-ठाकुर-बनिया) को आपस में लड़ाकर कमजोर किया जा रहा है। बीजेपी अब अंबेडकरवादी और पेरियारवादी राह पर चल पड़ी है ताकि एससी/एसटी/ओबीसी को जोड़ा जा सके, क्योंकि वे जानते हैं कि सवर्ण तो ‘बंधुआ’ है।

📢 अंतिम चेतावनी: होश में आओ सवर्णों!

तुम ‘अंधभक्ति’ के नशे में इतने पागल हो कि कैंडिडेट को देखे बिना वोट दे देते हो। फिर वही लोग तुम्हारे खिलाफ योजनाएं बनाते हैं और तुम्हारे ही वोट से तुम पर चोट करते हैं।
नंबर सबका आएगा! अगर आज भी तुम्हारी आँखें नहीं खुलीं और तुमने अपनी ‘अंधभक्ति’ नहीं छोड़ी, तो याद रखना—तुम्हें द्वितीय श्रेणी का नागरिक बना दिया गया है। आने वाले समय में अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए तुम्हें इस देश से पलायन करने के लिए तैयार रहना होगा।
जाग जाओ! इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

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