
भारतीय सभ्यता संस्कृति को ओल्ड फैशन बताना
आजकल हमारे बॉलीवुड का पतन इतनी तेजी से हो रहा है ये बहुत ही गंभीर सवाल है| जब आप अध्यन करेंगे तो पता चलेगा की हमारे कलाकार खास कर महिला अभिनेत्रियां चुटकी में शोहरत की बुलंदियों को छू लेने के चक्कर में हमेशा भारतीय संस्कृति को ओल्ड फैशन बताकर वेस्टर्न कल्चर ( नंग पने ) को अपग्रेड करती रहती है |
भारतीय सभ्यता संस्कृति को ओल्ड फैशन बताना निर्माता निर्देशक की मनमानीग्लैमरस हसीनाओ का कहर लेखक का मानसिक दिवालियापन
down fall
निर्माता निर्देशक की मनमानी
फिल्म निर्माता फिल्म बनाते समय बहुत सी शर्ते रखते है। उन्ही शर्तो में से एक शर्त होती है की आपको फिल्म में बोल्ड दिखना है। दर्शको को रिझाने के लिए छोटे कपड़े पहनना पड़ेगा , ताकि आप आकर्षण का मुख्य केंद्र लगो । दर्शक ज़्यादा आये और फिल्म की कमाई ज़्यदा हो। अभिनेत्रियों को भी ये शर्ते बखूबी सूट करती है और उनके लिए आगे बढ़ने का इससे अच्छा मौका नहीं दिखता वो तो तैयार बैठी है कपडे उतार नंगे होने क लिए , बस उनका ध्यान सिर्फ फेमस और पैसे पर टिकी रहती है , इसलिए छोटे कपड़े पहनती है |
ग्लैमरस हसीनाओ का कहर
फिल्मे आज कल चलती ही है ग्लैमर की वजह से। आज के समय में दर्शको का टेस्ट भी उसी तरह का हो गया है। लेकिन समाज में अभी भी सारे ठरकी छोकरो नहीं है , अभिनेत्रियों को यह बात कभी नहीं भूलनी चाहिए है की उनके बहुत से फोल्लोवेर्स होते है। देश में उनके चाहने बाले बहुत होते है। उनके छोटे कपड़े पहनने से देश और समाज में क्या फर्क पड़ेगा।
अभिनेत्रियां पार्टी में आकर्षण का केंद्र बन के रहना चाहती है। इसलिए भी भी छोटे कपड़े पहनती है। परन्तु उनको यह बात कभी भी नहीं भूलनी चाहिए है की छोटे कपड़े पहनने से आप सिर्फ आकर्षक ही दिखेगी।
इसका एक बड़ा कारण है लोगों की दूषित व पतनकारी मानसिकता। वो ही फ़िल्म हिट होती है व मोटी कमाई करती है जिंनमे ऐसे अश्लील दृश्य दिखाए जाते है, जिनफे लोग टकटकी निगाहों से देखते रहते हैं ।
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लेखक का मानसिक दिवालियापन
पहले स्क्रिप्ट राइटर अपने ऊपर काम करते थे वो रिसर्च कर वो मुद्दे लाते जो समाज के लिए आईने का काम करता था | फिल्मे तो एक सामाजिक जागरूकता फ़ैलाने का एक माध्यम होता है ये हर वर्ग हर पीढ़ी के लोगो को प्रेरित करती रही है , परन्तु अब जिस तरह ये काम कर रहे है उसमे ज़्यदातर सन्देश रवायतों के खिलाफ है आज की फिल्मे वास्तविकता से बहुत दूर जा चुकी है | इसमें न सिर्फ नग्नता अश्लीलता परोसी जा रही है बल्कि नशेड़ी गुंडागर्दी चरित्रहीन बलात्कारी को नायक के रूप में पेश किया जा रहा है |
मन के अंदर से देखकर इस रिश्तों का इल्जाम न दो,
हमने देखी है इन आँखों की महकती खुशबू,
नूर की बूंद नहीं है जो सदियों से बहा करती है,
सिर्फ एहसास है ये रूह है इसे महसूस करो,
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई और नाम न दो,
हमने देखी है इन आँखों की महकती खुशबू।
सस्ती लोकप्रियता पाने, लोगों के दिलों दिमाग में पैठ करने का यह एक सस्ता जरिया बन गया है। आज कल एक्टिंग के नाम पर आप कितने मिनट तक अच्छे से अपने को- स्टार के होठो को चूस सकते हो | कितने देर आप अपने को – स्टार को बेड पे सीन दे सकते हो| मुझे तो लगता है कुछ दिनों में बॉलीवुड नेशनल चुम्बन अवार्ड भी देगी |
आज से चार व पांच दशक पूर्व सेंसर बोर्ड की कैंची की धार बड़ी ही तीखी थी, इस प्रकार के दृश्यों को तत्काल काट दिया करती थी जो आज कल नाम मात्र की रह गयी है।
लोगों ने कामुकता को प्यार का पर्याय समझ लिया है |
सस्ती लोकप्रियता
नाम
दाम
और
काम
प्राप्ति के लिए
ये सब हो रहा है जो आने वाले हमरे पीढ़ियों को बर्बाद कर देगा इसलिए मैं सभी कलाकारों अभिनेत्रियों से अनुरोध करूँगा की ज़्यादा से ज़्यादा परदे में रहने दे पर्दा न उठाये |