स्वतंत्रता स्वाभिमान के वैश्विक प्रतिमान
अपने वतन अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वश्वा समर्पित करने वाला क्षत्रिय समाज आज हासिये पर पहुंच चूका है , फिर भी आज की राजनेताओ का जो हमारे वोट लेकर संसद पहुँचते उसका मन दिल नहीं भरता , देश के लगभग सभी राज्यों में क्षत्रिय समाज अपना एक अलग रुतबा और एक विशिष्ट पहचान रखती है | जैसे हम राजस्थान की बात करे तो आदिकाल से गौरव की भूमि रही है , और इस गौरव को बढ़ाया धरती पुत्र भारत पुत्र वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने , राजा जय सिंह जैसे वीर योद्धाओ ने इसी तरह लगभग सभी राज्यों का अपना एक इतिहास है , पर वर्तमान समय में इस इतिहास को धूमिल कर इस समाज को प्रताड़ित करने का अनुचित प्रयास किया जा रहा है | लेकिन अगर इतिहास के दृष्टिकोण से अगर देखे तो इस समाज को प्रताड़ित करना देश की गरिमा एकता अखंडता को खतरे में डालना है | ये मई बिलकुल तथ्यों को ध्यान में रख कर बता रहा हूँ | कोई ग़लतफहमी में न रहे अगर आपको लगता है तो लगने में कोई बुराई है , लेकिन अगर ऐसा लगता रहा तो लगते लगते ज़माने की तो जरूर लग जाएगी , अगर ज़माने की लग गई तो पूरी दुनिया मिलके आपको जरूर लगा देगी |
सबको साथ लेकर चलने की प्रवृति
वर्तमान समय में देश में एक से एक कद्दावर अधिकारी , प्रोफेसर , इंजीनियर , नेता , मंत्री सब भरे पड़े है परन्तु इतना सब होने के वावजूद सबको साथ लेकर चलने की प्रवृति खतम होने का नाम नहीं ले रही , लेकिन एक बात अब इनको समझना पड़ेगा की इनको साथ रखना कोई नहीं चाहता , हाल के कुछ वर्षो में कुछ बड़े नेता उभरकर सामने आये है जिसमे उत्तरप्रदेश के यशश्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी बृजभूषण शरण सिंह , रघुनाथ प्रताप सिंह जैसे नेताओ ने कमान संभाल रखा है | अगर बिहार की बात करे तो प्रभुनाथ सिंह , आनंद मोहन जैसे बड़े नेताओ के जेल जाने के बाद बिहार की राजनीती में उस समय से सामाजिक राजनितिक धारा कमजोर पड़ चुकी जो कभी अपने तेवर साफगोई और सांगठनिक ताकत के लिए जाने जाते थे उसकी चमक फीकी दिखने लगे , लेकिन इतना जरूर रहा की ये समाज की के दयापात्र नहीं बने , ये अपनी सामाजिक जड़ें अपने वोट बैंक की गोल बंदी और अन्य जातियों के साथ संतुलन बनाकर अपने दम पर खड़ी रही |
मध्यम वर्ग , पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग के साथ राजपूतो का सामंजस्य अच्छा
और एक जबरदस्त अनुभव शेयर करता हु , जहा जहा राजपूतो की बहुलता रही वहां वहां जातीय तनाव की जगह सामाजिक समरसता देखने को मिली , मध्यम वर्ग , पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग के साथ राजपूतो का सामंजस्य अच्छा रहा , जिसकी चर्चा कम होती , लेकिन असर साफ साफ दिखता है , आज भी वो छेत्र जहा राजपूतो की संख्यां कम है लेकिन प्रतिनिधित्व आज भी राजपूत ही कर रहे है , जैसे सारण, महराजगंज , मोतिहारी , शिवहर , विमविसार और अजातशत्रु का वैशाली , बक्सर जैसे छेत्रो में अभी भी दबदबा राजपूतो का है | हालिया चुनावो के परिणामो में राजपूतो का दबदबा जबरदस्त रहा , मौजूदा विधानसभा में 32 विधायक राजपूत समाज से जीत कर आये है | इससे साफ जाहिर है की ये समाज अपने तरीके से हसिये पर नहीं है पर देश के शीर्ष स्थान पर कुछ लोग है ऐसे जो देश में SC / ST जैसे काळा कानून लाकर समाज को कमजोर करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है |
अक्सर राजपूतो के साथ भेदभाव किया जाता है
केंद्र हो या राज्य भले ही वैसा प्रतिनिधितव या मान सम्मान न मिल रहा हो जैसे मिलना चाहिए जिसके की हक़दार है | अक्सर राजपूतो के साथ भेदभाव किया जाता है , कुछ जगह जातीय जनगणना में भी इनकी संख्या को सुनियोजित तरीके से कम कर दिखाने का प्रयास किया गया , सत्ता के गलियारे में हमेशा इनकी ताकत को कम कर दिखाने का प्रयास लगातार किया जाता है | इनसब का एक कारण ये भी रहा की राजनीती में एक लम्बे समय तक कोई ऐसा सर्वमान्य , निर्विवाद , सर्वस्वीकार्य राजपूत चेहरा मौजूद नहीं रहा , वर्तमान समय में इस जगह को देश के रक्षा मंत्री आदरणीय राजनाथ सिंह जी , उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी , राजस्थान के कद्दावर नेता गजेंद्र सिंह शेखावत , बिहार के कद्दावर नेता आदरणीय आनंद मोहन जी , और देश के सबसे ईमानदार कर्तब्यनिष्ठ और साहसी नेता राजकुमार सिंह जैसे लोगो ने संभाल रखा है |
70 साल से आरक्षण का दंश झेल रहे क्या कम था
आज मैं अपने लेख से इनसभी जननेताओं से अपील करना चाहते अगर आप जैसे नेता अगर संसद में मौजूद है तो SC/ST एक्ट UGC जैसे एक्ट पास कैसे हो रहे है ????? मुझे समझ में नहीं आ रहा 70 साल से आरक्षण का दंश झेल रहे क्या कम था ???? जो ऐसे ऐसे कला कानून पास कर अपने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने दे रहे , क्यों अपंग बनाने में सहयोग कर रहे आपलोग क्यों नहीं विरोध करने की हिम्मत जुटा पा रहे आपलोग ???? आज समय आ गया है की आप लोग एक जुट होकर अपनी ताकत दिखाइए |
देश में बैकडोर से शरिया नहीं बल्कि कलेक्टिव गिल्ट का कानून लागु हो गया है | जो अंग्रेजो के कला कानून ” रोलेट एक्ट ” की याद दिला रही , देश की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्थान UGC प्रमोशन ऑफ़ इक्वलिटी इन हायर एजुकेशन एक्ट 2026 लागु कर दिया | नाम बड़ा ही सॉफ्ट लग रहा पर मनसा एकदम खतरनाक है |
इस कानून के तहत SC , ST OBC जिसमे मुस्लिम जातियां भी शामिल है को जनम से ही पीड़ित शोषित घोषित कर दिया गया है | और जनरल कास्ट को जनम से अपराधी मन लिया गया है , अब बड़े बड़े स्कूलों विश्वविद्यालयो में न्याय नहीं पहचान के आधार पर फैसला होगा
SC/ST/OBC छात्र को अगर जाती सूचक शब्द महसूस हो जाये तो या व्यबहार प्रतिकूल लग जाये तो या मानवीय गरिमा को ठेस लग जाये तो
सामने वाला सवर्ण छात्र अपनेआप आरोपी बन जायेगा सबूत की कोई जरुरत नहीं | मेरे हिसाब से ये कानून नहीं एक नंगी तलवार की तरह है जो सिर्फ एक ही वर्ग के सिर लटकेगी
इसके दुष्परिणाम :-
कोई मेधावी छात्र को आसानी से झूठे केस में फसा कर उनका कररियर वर्वाद किया जा सकता है |
नोट्स नहीं दिया तो अपमान , फिल्म राजनीती या इतिहास पर डिबेट गरिमा का हनन , प्रोफेसर ने कम नंबर दिए बेसक से मूल्याङ्कन सही भी होगा तो तो इसको जातिगत भेदभाव माना जायेगा |
अब तर्क नहीं भावना चलेगी और भावना ही निर्णय करेगी , यह समानता के नाम पर सविधान का गाला घटना है | इतिहास इसे सामाजिक सुधार नहीं सामजिक बिभाजन का औजार मानेगी | संविधान बनाते समय अम्वेडकर जी जो जहर वो गए आज वो सामाजिक कैंसर का रूप धारण कर चूका है | और मोदी सरकार और जहरीला बीज वो रहा जो देश में गृहयुद्ध की पृष्ठ भूमि तैयार करेगा , मेरी विनम्र अपील वर्तमान मोदी सरकार इस बिल को अविलम्ब रद्द करे|

